Desh Deshantar: भारत-रूस सैन्य सहयोग | India-Russia Logistics Agreement

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एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल लॉजिस्टिक यानि ARLS समझौते के तहत रक्षा क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने के लिए भारत और रूस मिलकर काम करेंगे। नए समझौते के तहत भारत और रूस एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को रसद और ईधन के जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच माल ढुलाई और सैन्य ऑपरेशंस में सहयोग बढ़ेगा। इससे बड़ा फायदा भारतीय नौसेना को होगा जो बड़े स्तर पर रूसी मूल के शिप्स का इस्तेमाल करती है। समझौते के बाद ये शिप्स सप्लाई और ईधन की जरूरतों के लिए रूस के बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इनमें आर्कटिक महासागर से जुड़े बंगरगाह भी शामिल होंगे। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मॉस्को में कहा है कि भारत और रूस को मिलकर रक्षा उत्पादन करना चाहिए। साथ ही इन उत्पादों के निर्यात लिए एक प्लेटफॉर्म भी खड़ा करना चाहिए। इससे भारत और रूस दोनों ही बढ़त हासिल कर सकते हैं। दोनों देश मिलकर ऐसा प्लेटफॉर्म खड़ा कर सकते हैं, जिससे यह उत्पाद दूसरे देशों को बेचे जा सकें।

Guests: Anil Trigunayat, Former Ambassador,
Ajay Banerjee, Defence Correspondent, The Tribune,
Maj. Gen. (Retd.) Dhruv C Katoch, Director, India Foundation,

Anchor: Kavindra Sachan

Producer: Sagheer Ahmad

Nguồn: https://nhaxehoanglong.com

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44 thoughts on “Desh Deshantar: भारत-रूस सैन्य सहयोग | India-Russia Logistics Agreement

  1. 🙏💝🇮🇳🇷🇺💝🙏👌👌👌👌👌👌💪🇮🇳💝🇷🇺💪🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👈

  2. Along with Self propelled artillery ….. we need some flying tanks like A-10 warthog or Su25 frog foot…

  3. भारत – रूस शायद अन्तर्राष्ट्रीय जगत में मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण हैं… रूस ने हर परिस्थिति में भारत का साथ दिया है जिसके कारण भारत की निर्भरता भी बढ़ी है……. दोनो राष्ट्रो मैं सैन्य सहयोग बहुत आवश्यक है क्योंकि भारत इस हेतु बहुत ज्यादा रूस पर निर्भर हैं…..

    परन्तु भारत की सोच विश्व शक्ति बनने की रही है ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि यदि हम हथियार के लिए दूसरे देशो पर निर्भर रहेगें तो विश्व शक्ति कैसे बनेंगे….

    निर्यात हर समस्या का समाधान नही है… हमे खुद तकनीक विकसित करनी होगी
    हथियार हमें खुद बनाने होंगे, उसके पार्टस भी खुद बनाने होगें…. आज हम 70% हथियार निर्यात करते है मतबल हम विश्व शक्ति के रेस में पीछे है…

    ऐसे में भारत को चाहिए कि वह पैसा हथियार खरीदने से ज्यादा साथ में हथियार निर्मित करने पर जोर दे तथा समझौता भी इन्ही बिन्दुओं पर करे…. साथ ही इन हथियारो को रूस की मदद से भारत में निर्मित किया इससे हमारे देश तकनीक भी आयेगी साथ ही पार्ट के लिए जो अतरिक्त समय लगता है वह भी बचेगा,

    कोई भी देश तकनीक नही देगा पर साथ में रहकर हम कुछ तो सीख ही जायेगे और फिर कुछ अपने से डेबलप करेंगे….

    अगर एक वाक्य में बोलू तो भारत को तकनीक पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए तथा पूंजी निवेश भी तकनीक पर ही करना चाहिए……

  4. हमारी रूस पर रक्षा निर्भरता है जिसकी
    सबसे अच्छी बात यह है कि यह विश्वसनीय है ।

  5. भारत और रूस को अपने रक्षा व परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त उद्यम तैयार करके निर्यात करना चाहिए ।

  6. यह नहीं बताया गया कि भारत, रूस को क्या निर्यात कर सकता है !

  7. Russia denied the transfer of technology so many times. They don't even provide the fighter jet spare parts timely. Russia is deliberately delaying s400 delivery, because they're busy in making it for Turkey first.

  8. हमने यहाँ से ये लिया,हमने वहाँ से वो लिया।
    इस तरह से हम बन गये स्वाभिमानी,शक्तिशाली व आत्मनिर्भर राष्ट्र।
    भारतीय मस्तिष्क दुनिया में बेहतरीन मस्तिष्कों में से एक है।बस जरूरत है उसे बुनियादी सुविधा व अवसर उपलब्ध हो।

  9. धन्यवाद कवींद्र जी ।

    भारत और रूस परम्परागत रूप से अच्छे साझेदार रहे हैं ।
    वर्तमान में ARLs Agreement on reciprocal logistics के मायने ।

    भारत को फायदा
    1-भारत रुस से विभिन्न सैन्य उपकरणों का आयातक रहा है जैसे MIG21 MIG27 MIG29 SUKHOI30 AN32, IL76 TANK BNP TANK , VIKRAMADITY .
    भारत के सामने जो बड़ी समस्या आती है वो है स्पेयर पार्ट्स की । एक तो रूस से बार बार स्पेयर पार्ट्स मंगाने में समय लगता है दूसरा ये आर्थिक दृष्टि से भारत को महँगे पड़ते हैं । वर्तमान समझौते के तहत भारत मे ही रूस की तकनीक के स्थानांतरण से make in india के तहत उपकरण बनने से उपरोक्त दोनों समस्या का समाधान हो जाएगा ।
    ऐसी ही एक मिसाल है ब्रह्मोस मिसाइल

    फिर भारत अन्य देशों ,जो रूस के सैन्य उपकरण प्रयोग करते, को भी बेचकर लाभ कमा सकता ।

    2- भारत के जहाजों के लिए रूस के आस पास विचरण करने में लाभ मिलेगा । भारत बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीदता है या पश्चिम में black sea के पास में भी भारत के जहाजो को लाभ मिलेगा उन्हें सहायक वस्तुएं प्राप्त हो सकेगी ।

    रूस के लिए फायदा
    हिन्द महासागर और इसके पास वह अपनी सामरिक स्थिति मजबूत रख सकेगा भारत से भी उसके जहाजों को सहायता प्राप्त हो जाएगी ।

    यह समझौता अपने आप मे नया नही वरन इस तरह का समझौता भारत ने usa और france के साथ भी किया है । usa के साथ LEMOU नाम से समझौता जो निम्न परिस्थितियों में क्रियान्वित है
    SHIPS PORT CALLS, JOINT EXCERCISE, TRANING, HUMANTARION OPRETAIONS, DISASTER RELIEF WORK

  10. एक पुराना मित्र दो नए मित्र से बेहतर होता है। रूस और भारत के बीच रिश्ते में ये कथन बेहद प्रासंगिक है। रूस के साथ रक्षा संबंध एवं नजदीजियाँ न केवल चीन की विस्तारवादी नीतियों को प्रतिसन्तुलित करने में सफल होगी वरन प्रधानमंन्त्री मोदी द्वारा घोषित लूक एट ईस्ट इंडिया नीति को नए आयाम देगी।

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